Friday, July 31, 2026
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WORLD : यूरोप के बॉर्डर पर बेकाबू हुए हालात! मोरक्को से स्पेन में घुसे हजारों लोग, सेना बुलाने की नौबत

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स्पेन में हजारों की संख्या में मोरक्कन लोगों ने घुसपैठ की है। यह घुसपैठ सेउटा में हुई है। इसके चलते सेउटा के प्रशासन ने स्पेन से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने और सीमा को बहाल करने के लिए सेना भेजने का आग्रह किया है। हालांकि, स्पेन ने आपातकाल की मांग को खारिज कर दिया है।

बार्सिलोना: स्पेन के सेउटा में हजारों की संख्या में अवैध प्रवासियों ने घुसपैठ की है। सेउटा सरकार ने गुरुवार को कहा कि पिछले 10 दिनों में 1500 से 2000 लोग सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। अनुमान है कि गुरुवार को सैकड़ों और लोग पहुंचे, जिसके चलते क्षेत्रीय राष्ट्रपति जीसस विवाज ने पूर्ण मानवीय और सामाजिक आपातकाल घोषित किया है। उन्होंने मैड्रिड से सीमा पर नियंत्रण बहाल करने के लिए सेना भेजने और राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने का आह्वान किया है।

हालांकि, स्पेन के आंतरिक मंत्रालय ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की मांगों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वह नागरिकों की सुरक्षा और देश की सीमा की अखंडता की गारंटी देगा, लेकिन सरकार प्रवासन संबंधी चिंताओं को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित नहीं कर सकती। इसके चलते पूरे स्पेन में सरकार के खिलाफ नाराजगी देखी गई है। सोशल मीडिया पर स्पेनिश लोग बड़े पैमाने पर प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की आलोचना कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे देश के साथ गद्दारी करार दिया है।

स्पेन के स्यूटा में सीमा की निगरानी करने वाले सिविल गार्ड अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन के प्रमुख रशीद स्बिही ने कहा, “हालात पूरी तरह से अराजक हैं।” उन्होंने कहा, “सटीक संख्या बताना संभव नहीं है, लेकिन हजारों प्रवासी सीमा पार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सीमा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उत्तरी मोरक्को में मानवाधिकार संघ के सदस्य अशरफ मैमौनी ने स्थिति को “असाधारण” बताया। उन्होंने कहा, “आज सुबह असामान्य परिस्थितियों में ताराजल सीमा खोली गई और लोगों ने सीमा पार की।”

वीडियो फुटेज में ताराजल बीच पर बने तटबंधों के चारों ओर घूमते हुए लोगों की भीड़ दिखाई दी, जिनमें ज्यादातर मोरक्कोवासी थे। ये लोग काफी संख्या में युवा पुरुष थे, लेकिन इनमें महिलाएं और बच्चे सहित परिवार भी शामिल थे। एक फ्रीलांस फोटोग्राफर को देखकर कुछ लोगों ने “विवा एस्पाना!” के नारे लगाए। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि इतने सारे प्रवासियों को सेउटा जाने के लिए किसने प्रेरित किया।

NATIONAL : श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट का बड़ा फैसला, अब ट्रस्ट के तीन CA की आईडी से मिलेगी दर्शन पास की सुविधा

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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए मंदिर में ट्रस्ट के तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को भी इसके लिए अधिकृत किया है। इनके नाम की आईडी है।यह निर्णय पूर्व महासचिव चंपतराय व पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र एवं गोपाल राव की आईडी बंद होने के कारण लिया गया है। ट्रस्टीद्वय के त्यागपत्र के बाद अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में भक्तों की सुविधा के संबंध में प्रबंध किए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन पास हासिल हो सकेगा।

उधर आरएसएस से जुड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के लिए पास की अलग से व्यवस्था है। विभाग प्रचारक व कार्यालय प्रमुख की संस्तुति पर पास जारी हो रहे हैं। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के नाम से बनीं पास आईडी काम करने लगी है। पास जारी हो रहे हैं।

जिला व पुलिस प्रशासन के लिए अलग से पास का कोटा है। नित्य कुल लगभग एक हजार आठ सौ पास जारी होते हैं। ये छह स्लाट में जारी किए जाते हैं। एक स्लाट दो घंटे का है और प्रत्येक में तीन सौ पास जारी हाेते हैं। इसी में विशिष्ट व सुगम पास निहित हैं।दरअसल ट्रस्ट के तीनों सीए को पास जारी करने के लिए इसलिए भी अधिकृत किया गया है, जिससे त्यागपत्र दे चुके ट्रस्टियों व मंदिर व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव की ओर से जारी होने वाले पास नियमित जारी होन लगें। इसमें बाधा न आए। पूर्व महासचिव चंपतराय को देश व दुनिया के भक्त पास बनवाने के लिए आवेदन भेजते थे।

उनके कुछ करीबी पास निर्गत करा देते थे। पास उन्हीं की आइडी से बनते थे। कुछ ट्रस्ट कर्मियों को दूसरों को आईडी पर पास बनवाने की छूट थी। इनकी संस्तुति पर भी पास बन जाते थे। डॉ. अनिल कुमार मिश्र की आईडी स्थानीय जनों के अतिरिक्त आरएसएस पदाधिकारियों के लिए सर्वसुलभ थी।इस समय कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि ट्रस्टी महांत दिनेंद्रदास सहित अन्य ट्रस्टी के नाम से नियमित विशिष्ट व सुगम दर्शन पास जारी होते हैं। एक ट्रस्टी ने इसकी पुष्टि की।

NATIONAL : बिहार में टीचर के क्लास में मोबाइल ले जाने पर लगेगी रोक, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दिए निर्देश

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बांका: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों के कक्षा में मोबाइल फोन ले जाने पर सख्ती के संकेत दिए हैं। बांका परिसदन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षक विद्यालय पहुंचने के बाद कक्षा में जाने से पहले अपना मोबाइल फोन प्रधानाध्यापक के पास जमा कर दें। उन्होंने कहा कि कक्षा के दौरान मोबाइल पर आने वाले फोन और अन्य व्यवधानों से पढ़ाई प्रभावित होती है, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों को परेशानी होती है।

मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि फिलहाल विभाग इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं कर रहा है। पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं अन्य शिक्षा अधिकारी शिक्षकों से इस व्यवस्था का स्वेच्छा से पालन करने का अनुरोध करें। अगर इसके बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो शिक्षा विभाग इस संबंध में औपचारिक निर्देश जारी कर अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

सभी सरकारी विद्यालयों की साफ-सफाई, रंग-रोगन करने का निर्देश
बैठक में मंत्री ने बांका जिले की शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि जिले में शिक्षकों की कमी स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद काफी हद तक दूर हो जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को श्रावणी मेला को देखते हुए कांवरिया पथ के किनारे स्थित सभी सरकारी विद्यालयों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामने बिहार के सरकारी विद्यालयों की सकारात्मक छवि दिखाई देनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रावणी मेला के दौरान किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। विद्यालयों में नियमित रूप से पठन-पाठन और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का संचालन सुनिश्चित किया जाए। विद्यालय अवधि में बच्चे कक्षा के अंदर अध्ययन करते हुए दिखाई दें।

NATIONAL : भोपाल में लव जिहाद का जाल… ये जिहादी नशे के भी सौदागर, पहचान छुपाकर करते हैं दोस्ती, फिर लड़कियों को झोंक देते नशे के अंधेरे में

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तीन नाबालिग हिंदू लड़कियों को झांसे में लेने के बाद उनसे निकाह-मतांतरण कराने की मुस्लिम युवाओं के गिरोह की करतूतों से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लंबे समय से जड़ें जमाए लव जिहाद की सुनियोजित साजिशों की परतें खुलती जा रही हैं। अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए ये लोग नशे के सौदागर भी बने हुए हैं। उनके निशाने पर खासतौर पर घर-परिवार से दूर रहकर पढ़ने या फिर नौकरी करने वाली लड़कियां रहती हैं।

क्लब पार्टियों में ले जाकर बनाते नशे का लती
भोपाल में कुछ महीने पहले एक क्लब में राजफाश हुआ था कि वहां ऐसी पार्टी की जाती थीं, जिनमें अधिकांश हिंदू युवतियों को ही बुलाया जाता था। लव जिहाद के जाल में फंसी इन युवतियों को होटल और क्लब में शराब ही नहीं, एमडी ड्रग जैसे घातक नशे की डोज भी दी जाती थी। हालांकि कुछेक आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई।

पुलिस की ऐसी ही शिथिल और औपचारिक कार्रवाई इस नेटवर्क को तोड़ नहीं पाती। पुलिस जांच में सामने आ चुका है कि लव जिहाद गिरोह से जुड़े लोग शहर के बाहरी इलाकों में स्थित कुछ कैफे और रेस्टोरेंट्स को भी अड्डा बना चुके हैं। 2025 में पिपलानी के आनंद नगर स्थित क्लब 90 रेस्टोरेंट में इसके सबूत मिले थे। इसको सील करने के बाद प्रशासन ने बुल्डोजर चला दिया था।

डराने-धमकाने से भी गुरेज नहीं
वहीं, अशोकनगर जिले की पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि गिरोह ने नाबालिग लड़कियों को फंसाने के बाद उनको अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि का परिचय देकर डराया भी। एसडीओपी विवेक शर्मा ने बताया कि आरोपित अल्तमस खान का बड़ा भाई हत्या के मामले में जेल में बंद है। अल्तमस पर भी चेन स्नेचिंग, मोबाइल छिनैती का केस है। अहान अली पर इसी तरह के अपराध हैं।

एक किन्नर भी इनका साथी है, जो लड़कियों को ट्रेप करने में मददगार रहा है। फिलहाल पुलिस ने आरोपितों को न्यायालय में पेश कर एक दिन की रिमांड ली है। पुलिस संदिग्ध मददगारों और धर्मगुरुओं की शिनाख्त में जुटी है, जो इसमें मदद कर रहे थे।

मुस्लिम युवाओं का यह गिरोह कितना बेखौफ है, इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि एक तो वे नाबालिग से निकाह करते हें, दूसरा लड़की को बुर्का पहनाकर घर भेजकर यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता।

दरअसल, अशोक नगर जिले की नाबालिग लड़कियों के भोपाल में मतांतरण की जांच कर रही पुलिस टीम के एक अधिकारी बताते हैं कि एक नाबालिग लड़की घर लौटी तो उससे निकाह करने वाला आरोपित अल्तमस खान हर आधे घंटे बाद वीडियो कॉल कर यह सुनिश्चित करता रहा कि उसने सही ढंग से बुर्का पहन रखा है या नहीं?

यह लड़की बुर्का पहनकर मां के पास नहीं पहुंची होती तो शायद बहुत देर में इस षड़यंत्र का राजफाश हो पाता, क्योंकि पिछले साल मतांतरित हुईं इसकी दो सहेलियों के स्वजन को इनके मतांतरण और निकाह तक हो जाने की कोई जानकारी नहीं थी।

NATIONAL : फर्जी कर्मचारी, फर्जी PF खाते.. Nokia के दो कर्मचारियों ने डकारे 19 करोड़!

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CBI ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ 19.33 करोड़ रुपये के EPF घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया है. आरोप है कि साल 2023-24 के दौरान 94 फर्जी कर्मचारी खातों में रकम ट्रांसफर की गई. मामले का खुलासा EPFO की जांच और कंपनी की फोरेंसिक ऑडिट के बाद हुआ.

केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े 19.33 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में केस दर्ज किया है. आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी कर्मचारी खातों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की. CBI ने इस मामले में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को आरोपी बनाया है. वैभव वर्मा कंपनी में पेरोल क्लस्टर लीड के पद पर थे, जबकि कमाराजू मुत्याला पेरोल मैनेजमेंट हेड के रूप में कार्यरत थे. इनके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी एफआईआर में आरोपी बनाया गया है.

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच के अनुसार, वर्ष 2023 से 2024 के बीच आरोपियों ने कथित तौर पर 94 फर्जी कर्मचारी खातों में EPF की 19.33 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी. आरोप है कि ये सभी खाते वास्तविक कर्मचारियों के नहीं थे और इन्हें धोखाधड़ी के उद्देश्य से तैयार किया गया था.

मामले की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है. नोकिया पहले कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत एक एक्जेम्प्टेड एस्टैब्लिशमेंट थी. जुलाई 2023 में कंपनी ने अपनी छूट वापस लेने के लिए आवेदन किया. EPFO से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने सभी पुराने सदस्यों की जमा राशि EPFO को ट्रांसफर कर दी और 1 सितंबर 2023 से वह अन-एक्जेम्प्टेड एस्टैब्लिशमेंट के रूप में काम करने लगी. इसी दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद EPFO की जोनल फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी ने जांच शुरू की. जांच में 94 ऐसे लाभार्थी खाते मिले, जिन्हें वास्तविक नहीं माना गया.

दूसरी तरफ, नोकिया ने भी अपने स्तर पर फोरेंसिक ऑडिट कराया. इस जांच में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को उन अधिकारियों के रूप में चिन्हित किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर इन ट्रांसफरों की प्रक्रिया को अंजाम दिया. फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी सामने आए. जांच के दौरान आरोपियों के लैपटॉप से हटाई गई सबमिशन फाइलें बरामद हुईं. इसके अलावा ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी मिले, जिनमें कंपनी से जुड़े नहीं होने वाले लोगों का विवरण दर्ज था. जांच में फर्जी रोजगार सत्यापन और आधिकारिक लॉगिन का उपयोग कर नकली खातों के लिए KYC मंजूर किए जाने के भी प्रमाण मिलने का दावा किया गया है.

इन निष्कर्षों के बाद नोकिया ने दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया. कंपनी ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की और पूरे मामले की जानकारी EPFO को दी. इसके बाद EPFO की शिकायत के आधार पर CBI ने औपचारिक मामला दर्ज किया. मामले पर नोकिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी नियमों के पालन को गंभीरता से लेती है और अपने सभी कारोबारी कामकाज में नैतिकता तथा पारदर्शिता के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है. हालांकि मामला जांच के अधीन होने के कारण कंपनी ने इसके तथ्यों पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया. फिलहाल CBI पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

NATIONAL : दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल ला रही सरकार, सभी संपत्तियों का बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड

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नई दिल्ली। दिल्ली की हर संपत्ति को अब स्थायी डिजिटल पहचान मिलने जा रही है। इसके लिए सरकार दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026 लाएगी। इसमें राजधानी की प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी की संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वे कर उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उसके बाद हर संपत्ति को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी यानी प्रॉपर्टी आधार कार्ड जारी होगा। सरकार का दावा है कि इससे सालों से चले आ रहे भूमि विवाद, फर्जी रिकॉर्ड और स्वामित्व संबंधी समस्याओं के समाधान का रास्ता खुलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दिल्ली के 30 ग्रामीण गांवों में ड्रोन सर्वे कर डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब यही व्यवस्था पूरी दिल्ली में लागू की जाएगी। इसके लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक ड्रोन मैपिंग का इस्तेमाल होगा। सरकार का मानना है कि एक समान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में संपत्तियों की पहचान और सत्यापन आसान होगा।

हर मंजिल का भी बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
प्रस्तावित कानून के तहत केवल भूखंड या भवन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक इमारत की हर मंजिल का अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सर्वे के दायरे में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य सभी प्रकार की संपत्तियां आएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी की कोई भी संपत्ति डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर न रहे। सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक संपत्ति को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी आवंटित की जाएगी।

विवादों से लेकर खरीद-बिक्री तक मिलेगी राहत
सरकार का कहना है कि वर्षों से व्यवस्थित भूमि रिकॉर्ड नहीं होने के कारण लोगों को स्वामित्व साबित करने, खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक ऋण, नक्शा स्वीकृति और अदालतों में लंबित मामलों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रमाणिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे रिकॉर्ड संबंधी अस्पष्टता कम होगी और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों और एक ही संपत्ति पर कई दावों जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा।

डिजिटल शासन की नई नींव बनेगा बिल
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह पहल केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली में डिजिटल भूमि प्रबंधन व्यवस्था की आधारशिला बनेगी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल मैपिंग और आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार रिकॉर्ड से नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तेज सेवाएं मिल सकेंगी।

विशेष सत्र में पेश होगा विधेयक
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026 को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद इसे मंजूरी की प्रक्रिया में लाया गया है। सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाएगी। कानून लागू होने के बाद चरणबद्ध तरीके से पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा और प्रत्येक संपत्ति को डिजिटल पहचान देने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का दावा है कि यह कदम राजधानी में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन को नई दिशा देने के साथ संपत्ति संबंधी व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाएगा।

NATIONAL : लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा सख्त कानून

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लोकसभा के बाद सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा में पारित हो गया है। अब कानून बनने के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा।

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए लाया गया ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ यानी एंटी पेपर लीक बिल अब राज्यसभा से भी पास हो गया है। लोकसभा से 29 जुलाई को पारित होने के बाद, बृहस्पतिवार को राज्यसभा ने भी भारी हंगामे के बीच इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा, जिसके बाद यह पूरे देश में कानून का रूप ले लेगा।

इस नए विधेयक में फर्जीवाड़े और पेपर लीक रोकने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं। प्रावधानों के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक करने या नकल कराने वालों को 5 से 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। यदि यह अपराध किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो सजा कम से कम 7 साल की जेल होगी और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसके अलावा, मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी और राज्यों में बनने वाली त्वरित अदालतें (फास्ट ट्रैक कोर्ट) तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करेंगी।

विधेयक के पारित होने से पहले सदन में तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा बिल पेश किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह कानून छात्रों के भले के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में लेकर आई है। खरगे ने कहा कि सरकार ने कड़ा कानून बनाने में दो साल की देरी की, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ।

सदन में अपने संबोधन के दौरान खरगे ने छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा उठाया और कहा कि जब छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। इस पर सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा ने कड़ा ऐतराज जताया और खरगे की भाषा को असंसदीय बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। तीखी नोकझोंक और बहस के बाद आखिरकार बिल को उच्च सदन की मंजूरी मिल गई।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि गृह मंत्री के बारे में खरगे की टिप्पणी कांग्रेस की ’’तुच्छ मानसिकता और पराजित मानसिकता’’ को दर्शाता है। त्रिवेदी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ’’राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गृह मंत्री के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। हमने सदन में इसका पुरजोर विरोध किया। हालांकि, हमारे विरोध के बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी में संशोधन किया, लेकिन उनकी असली मानसिकता उजागर हो गई।’’

उन्होंने कहा, ’’इससे पहले हमने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते देखा और आज राज्यसभा में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।’’ भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ खरगे और राहुल गांधी की टिप्पणियां उनकी ’’हताशा’’ को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, ’’जनता लगातार आपको नकार रही है। ऐसी भाषा के इस्तेमाल से आप लोगों की नजरों में भी गिर गए हैं।’’

NATIONAL : पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने से अदालत का इनकार

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गुवाहाटी : गुवाहाटी की एक अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा उनके पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति होने के आरोपों को लेकर दायर एक मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध वाली असम पुलिस की याचिका खारिज कर दी है.यह आदेश कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा 7 अप्रैल को पारित किया गया था. यह आदेश खेड़ा द्वारा तेलंगाना उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने से एक दिन पहले सुनाया गया था.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत के आदेश की प्रति रविवार को यहां मीडिया के साथ साझा की गई. सीजेएम ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए बताए गए आधार “पूरी तरह से अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं, और रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी सामग्री से समर्थित नहीं हैं.’’

आदेश में कहा गया, “इसके अलावा, चूंकि यह मामला संज्ञेय है और अपराध गैर-जमानती है, इसलिए जांच अधिकारी को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, जांच के उद्देश्य से आवश्यक समझे जाने पर, बीएनएसएस की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से ही प्राप्त है.”

मुख्य न्यायिक न्यायाधीश ने कहा, “उपरोक्त के मद्देनजर, गैर-जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसलिए इसे अस्वीकार किया जाता है.”खेड़ा के खिलाफ मामला गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 और 318 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने 6 अप्रैल को कांग्रेस नेता और उनके साथ मिलीभगत करने वाले सभी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था.उन्होंने दावा किया कि खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित दो संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए आरोप गलत और निराधार हैं. खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट/गोल्डन कार्ड और विदेश में संपत्ति है, जिसका उल्लेख उनके पति के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि खेड़ा द्वारा अपने आरोपों के समर्थन में दिखाए गए “सभी दस्तावेज फर्जी, छेड़छाड़ किए गए, जाली और गढ़े हुए” थे और ये दावे “सार्वजनिक अव्यवस्था और सार्वजनिक संशय पैदा करने के आपराधिक इरादे से किए गए थे, जिससे एक अत्यंत संवेदनशील चुनावी चरण में सार्वजनिक अशांति भड़काने, नागरिकों को गुमराह करने और सार्वजनिक शांति भंग करने की आशंका थी.’’खेड़ा को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी. हालांकि, पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय ने असम सरकार की याचिका पर गौर करते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी.

उच्चतम न्यायालय ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रिंकी भुइयां सरमा द्वारा उनके खिलाफ दायर मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा का अनुरोध किया था.उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता को इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत में याचिका दायर करने को कहा था और स्पष्ट किया था कि वहां की अदालत उनकी याचिका पर तेलंगाना उच्च न्यायालय और उसके द्वारा की गई किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी पर ध्यान दिए बिना सुनवाई करेगी.

SPORTS : ब्राजील फुटबॉल टीम के भारत दौरे की तैयारी तेज, इस शहर में हो सकता है इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच

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भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक रोमांचक खबर है. रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध ब्राजील की फुटबॉल टीम अक्टूबर में कोलकाता में एक इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच खेल सकती है. यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है.

भारत के फुटबॉल फैंस के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया की सबसे मशहूर फुटबॉल टीमों में से एक ब्राजील की राष्ट्रीय टीम भारत आ सकती है. बताया जा रहा है कि ब्राजील टीम अक्टूबर में कोलकाता में एक इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच खेल सकती है. अगर यह मैच तय हो जाता है, तो यह भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होगा. फैंस को पहली बार भारत में ब्राजील जैसी बड़ी टीम को खेलते हुए करीब से देखने का मौका मिल सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राजील फुटबॉल फेडरेशन और मैच कराने वाले आयोजकों के बीच बातचीत चल रही है. अब सिर्फ समझौते से जुड़ी कुछ आखिरी औपचारिकताएं (Formalities) पूरी होना बाकी हैं.

सितंबर-अक्टूबर इंटरनेशनल विंडो में तीन मैचों की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्राजील की टीम सितंबर और अक्टूबर के इंटरनेशनल विंडो में तीन फ्रेंडली मुकाबले खेलने की योजना बना रही है. इनमें से शुरुआती दो मुकाबले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जाने हैं. पहला मैच 25 सितंबर को टाउन्सविले और दूसरा मुकाबला 29 सितंबर को ब्रिस्बेन में आयोजित होने की संभावना है. वहीं तीसरे मुकाबले के लिए अभी विपक्षी टीम का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है. हालांकि, रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस मैच की मेजबानी के लिए कोलकाता को संभावित शहर के रूप में देखा जा रहा है.

भारत के खिलाड़ियों के लिए बड़ा सीखने का मौका
भारतीय फुटबॉल टीम इस समय फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर है. टीम लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वर्ल्ड कप में पहुंचने का सपना अभी पूरा नहीं हो सका है. ब्राजील जैसी विश्व स्तरीय टीम के खिलाफ खेलने से भारतीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की फुटबॉल, रणनीति और दबाव में प्रदर्शन करने का अनुभव मिलेगा. यह मुकाबला भारतीय फुटबॉल के विकास के लिहाज से भी अहम साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले घरेलू खिलाड़ियों को प्रेरणा देते हैं और युवा फुटबॉलरों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा (Competition) को समझने का मौका देते हैं.

कोलकाता में फुटबॉल का बढ़ सकता है रोमांच
कोलकाता को भारत का फुटबॉल गढ़ माना जाता है. यहां फुटबॉल को लेकर जुनून लंबे समय से देखने को मिलता रहा है. शहर के प्रशंसकों के बीच ब्राजील की टीम को लेकर खास उत्साह देखने को मिल सकता है. अगर यह मुकाबला आधिकारिक रूप से तय होता है तो कोलकाता में बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है. यह मैच भारत में फुटबॉल संस्कृति को और मजबूत करने वाला आयोजन बन सकता है.

वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील को मिला बड़ा झटका
ब्राजील की टीम के लिए फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सफर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. रिपोर्ट्स के अनुसार, टीम को राउंड ऑफ-16 मुकाबले में नॉर्वे के खिलाफ 2-1 से हार का सामना करना पड़ा और वह टूर्नामेंट से बाहर हो गई. यह ब्राजील के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि 1990 के बाद पहली बार टीम वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच पाई. ब्राजील ने अपना पिछला वर्ल्ड कप खिताब 2002 में जीता था. इसके बाद से टीम छठी बार विश्व चैंपियन बनने का इंतजार कर रही है.

NATIONAL : आरजी कर केस: सीबीआई ने जांच अधिकारी बदला, पीड़ित परिवार को नई उम्मीद जगी

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कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई. लंबे समय से जांच का नेतृत्व कर रही सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा की जगह संदीपनी गर्ग को नया जांच अधिकारी बनाया गया है. पीड़िता की मां ने गर्ग से मुलाकात की है और उन पर परिवार का भरोसा जताया है.

सूत्रों के मुताबिक मृतका के माता-पिता लंबे समय से जांच की प्रोग्रेस से खुश नहीं थे. उन्होंने जांच अधिकारी को बदलने की रिक्वेस्ट की थी, जिसमें मांग की गई थी कि जांच में तेजी लाई जाए और केस के अलग-अलग पहलुओं की फिर से जांच की जाए. आखिरकार, इस मांग को मानते हुए सीबीआई ने जांच अधिकारी को बदलने का फैसला किया.

खबर है कि संदीपनी ने नया रोल संभालने के बाद से ही केस के डॉक्यूमेंट्स को रिव्यू करना शुरू कर दिया है. उन्होंने इन्वेस्टिगेशन के अलग-अलग स्टेज से लेकर सबूत और फोरेंसिक रिपोर्ट तक सब कुछ चेक किया है. इसके अलावा, वह अब तक हुई प्रोग्रेस का डिटेल में रिव्यू करेंगी. इन्वेस्टिगेशन टीम के सूत्रों का कहना है कि अगर जरूरी हुआ, तो कुछ गवाहों से फिर से पूछताछ की जा सकती है, और आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं.

इस बीच जांच अधिकारी और पीड़ित परिवार के बीच मीटिंग के दौरान एक इमोशनल पल भी आया. सूत्रों की रिपोर्ट है कि ‘अभया’ की माँ ने नए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर का हाथ पकड़ा और कहा, ‘मुझे आप पर भरोसा है.’ उनकी बस यही उम्मीद है कि लंबा इंतजार खत्म होगा, सच सामने आएगा, और गुनाहगारों को कानून के तहत ज़्यादा से ज़्यादा सजा मिलेगी.

कई लोग जांच अधिकारी के बदलने को केस में एक अहम मोड़ मान रहे हैं. हालांकि सीबीआई ने इस मामले पर कोई डिटेल्ड बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि यह फैसला ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और जांच में तेजी लाने के लिए किया गया. खास तौर पर आरजी कार की घटना ने पूरे देश में भारी हंगामा मचा दिया था. घटना के बाद से मेडिकल कम्युनिटी, आम जनता और पीड़ित का परिवार तेजी से और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

ऐसे हालात में जांच अधिकारी बदलने के फैसले से चल रही जांच में एक नया पहलू जुड़ने की उम्मीद है. कई लोगों का यह भी मानना ​​है कि आरजी कार की घटना ने राज्य में हाल के राजनीतिक बदलावों में भूमिका निभाई. उनका मानना ​​है कि उस समय की तृणमूल सरकार रेप और हत्या के बाद स्थिति को ठीक से संभालने में नाकाम रही.

तारीख थी 9 अगस्त, 2024. ट्रेनी डॉक्टर की बॉडी आरजी कर हॉस्पिटल के चौथे फ्लोर के सेमिनार हॉल से मिली. बाद की जांच में पता चला कि उसके साथ रेप और मर्डर हुआ था. इस केस के सिलसिले में कोलकाता पुलिस ने अपने एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को गिरफ्तार किया. इसके बाद राज्य में पॉलिटिकल टेंशन बढ़ गया. प्रोटेस्ट मूवमेंट के दबाव में आकर, उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर, विनीत गोयल को उनके पद से हटा दिया गया.

बाद में घटना की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इसके बाद सियालदह कोर्ट ने संजय को उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, पीड़ित के परिवार और आरजी कार कर प्रोटेस्ट मूवमेंट में शामिल कई लोगों का कहना है कि संजय अकेले इतना बड़ा जुर्म नहीं कर सकता था.

इस बीच राज्य के पॉलिटिकल माहौल में बदलाव के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तीन आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया. इनमें उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल भी शामिल थे. जो इस घटना से अलग-अलग तरह से जुड़े थे. सुवेंदु ने यह भी संकेत दिया कि नई सरकार आरजी कार मुद्दे पर प्रोएक्टिव कदम उठाएगी, और यह प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है.

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